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जिन्दगी का महकता गुलदस्ता

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प्यार में कभी कभी

Posted On: 30 Jun, 2012 Others में

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चाहा तो बहुत ना चाहे तुझे, चाहत पर मगर कोई ज़ोर नहीं दिल ही तो है तुम पे आ ही गया, दिल का सनम ये कसूर नहीं…

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सोनम मुझे दो साल पहले बैंगलौर में मिली थी. बैंग्लौर के जिए ऑफिस में मैं काम करता था उसका वहां अक्सर आना जाना होता था. शुरू शुरू में तो मैं उसे बस देखता रहता था लेकिन जिस दिन उसने मुझसे पहली बार बात की उस दिन से उसे देखते ही मेरा दिल तेज धडक़ना शुरू हो जाता था.

दो बार तो वो यूं ही कुछ पूछने मेरे पास आयी लेकिन जब शायद उसे लगा होगा कि मैं हेल्पिंग नेचर का हूं तो जब भी कोई काम पड़ता वह मेरे पास ही आती. यह बात ऑफिस में सबको खटकने भी लगी थी क्योंकि कलीग्स यह कहकर मुझे चिढ़ाने लगे थे कि कहीं कोई चक्कर तो नहीं. मुझे लगा कि कहीं वाकई उस लडक़ी को भी कुछ कहना ना शुरू कर दें तो मैंने उसे इग्नोर करना शुरू कर दिया.

ना जाने क्या हुआ कि मेरी इग्नोरेंस का उसने गलत मतलब निकाल लिया और फिर उसने मुझसे बात करना ही छोड़ दिया. सोनम का नम्बर भी मेरे पास है लेकिन कभी बात करने की हिम्मत ही नहीं हुई. मैं उस वक्त शायद सोनम से यह नहीं कह पाया कि मुझे शायद तुमसे प्यार होने लगा था और प्यार ना हो जाए इस डर से शायद मैंने तुम्हें इग्नोर किया लेकिन आज मैं यह कंफेस करना चाहता हूं कि वाकई मुझे तुमसे प्यार है वरना यह दिल इस तरह ना तड़पता तुम्हारे लिए.



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