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जिन्दगी का महकता गुलदस्ता

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एक दुखी बेसहारा आशिक : कुछ हिन्दी शायरियां

Posted On: 8 Jul, 2011 Others में

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यह कविता हमारे एक मित्र ने भेजी है बेचारे इश्क के जहां में अपना सब कुछ लुटा कर बैठे हैं. इनके दिल की आवाजें सुनकर आजकल मेरे सारे मित्रों ने इनसे अपनी गर्लफ्रेंडों को छुपाना शुरु कर दिया है. जरा गौर फरमाइएं मेरे मित्र के दुखों पर

दो पल की भी खुशी न मिली तो क्या हुआ
उमर भर गम के सहारे जी लेंगे..

क्या हुआ जो हमारी girlfriend नही, Writing
हम आपकी girlfriend के सहारे जीलेंगे.

–::अर्ज़ क्या है:::–

बहार आने से पहले फिजा आ गई,
की बहार आने से पहले फिजा आ गई,
और फूल खिलने से पहले…
उन्हें बकरी खा गई..!

—:::अर्ज़ किया हैं:::—

हम भी आपके लिए ताजमहल बनायेंगे..
गौर कीजिये,
हम भी आपके लिए ताजमहल बनायेंगे..
1 कप ख़ुद और 1 कप आपको पिलायेंगे!
वाह ताज!


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