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प्यार हर दिल की जरुरत, पर कैसे हो पूरी

Posted On: 14 Sep, 2010 Others में

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जीवन एक ऐसा सफर है जिस पर चलने के लिए किसी न किसी की जरुरत तो होती ही है फिर चाहे वह आपका कोई दोस्त हो, प्रेमी हो या पत्नी. आप चाहे अमीर हों या गरीब प्यार की जरुरत हर किसी को होती है.

love means LIFE

love means LIFE

हम अपने विपरीत सेक्स वाले किसी को “साथी” बनाना पसंद करते हैं. ऐसा शायद मानवीय संवेदनाओं की वजह से हो लेकिन यह भी सत्य है कि एक पुरुष अपनी समस्या स्त्री को बताकर ज्यादा सुकून पाता है और इसी तरह स्त्री भी. यह बात प्रमाणित भी हो चुकी है

मैंने अपने जीवन में ऐसे कई लोग देखे हैं जिन्हें प्यार से नफरत तो होती है लेकिन जानते हैं वह प्यार से नफरत क्यों करते हैं क्योंकि उन्हें कहीं प्यार नहीं मिलता. ऐसे लोग भी प्यार करना चाहते हैं लेकिन अपने दिल की बात किसी से कह नहीं पाते. उन्हीं लोगों की मदद के लिए मैंने यह ब्लॉग लिखना शुरु किया है.

प्यार की वैसे तो कोई उम्र नहीं होती लेकिन फिर भी 14 की उम्र से हर किसी में दूसरे लिंग के प्रति आकर्षण बनने लगता है. स्कूल, साथ खेलने वाले दोस्त, आसपास रहने वाले या किसी खास के प्रति आपका आकर्षण बनने लगता है.

नोट :  अक्सर शुरुआती उम्र में होने वाला प्यार, प्यार नहीं आकर्षण होता है. कच्ची उम्र का प्यार आकर्षण की देन होती है इसलिए ऐसे रिश्ते जल्दी टूट भी जाते हैं पर अगर यही रिश्ते अधिक दिन तक रहते हैं तो हो सकता है वही आपका असली प्यार हो जैसे मेड फॉर इच अदर.

20 साल तक आते-आते सबसे दिल में कोई न कोई लड़का या लड़की जगह बना ही लेती है.

couple-valentines-dayतो सबसे पहले चुने एक अच्छा साथी: याद रखें किसी साथी को ढ़ूंढने में जल्दबाजी न दिखाएं. आप किसी ऐसे को अपना हमदम चुनें जिसे आप बेहतर ढंग से जानते हों. क्योंकि जिसे आप जानते होंगे वह भी आपको समझता होगा. कई मायनों में जब आप किसी दोस्ती को गहरी करते हैं तो निम्न बातें ध्यान रखने लायक हैं:

1. जिसे आप अपना “साथी” बनाना चाहते हों जरुरी है कि वह भी आपको समझता हो.

2. “साथी” चुनने से पहले अच्छी तरह देख लें कि कहीं कोई और तो नहीं जो आपके लिए ठीक हो.

3. कभी-कभी लंबे रिश्तों से अच्छी होती है पक्की दोस्ती.

अच्छे साथी को चुनने से पहले उसके बारे में सही से सोच लें, जान लें और समझ लें.

अपने किसी बचपन के दोस्त को अक्सर टीनएजर्स अपना प्यार बनाते हैं जो एक हद तक सही भी होता है.

मेरा पहला प्यार भी मेरी क्लास की ही एक दोस्त थी. बचपन का आकर्षन टीनएज में प्यार बना और युवा होते-होते खत्म हो गया.

याद रखिए शक का इलाज कभी नहीं किया जा सकता. अपनी दोस्ती को इतना मजबूत रखिए कि उसमें किसी शक की गुंजाइश न रह जाए. और दोस्ती एक गाड़ी की तरह होती है जिसे विश्वास और स्नेह के ईंधन की जरुरत होती है.

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1 प्रतिक्रिया

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Soni garg के द्वारा
September 15, 2010

Blog on love gr8 …….


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